सभी कलाकारों को यह अवसर नहीं मिलता कि वे अपने करियर की शुरुआत किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के लीड रोल से करें और धमाकेदार पहचान हासिल करें। कई अभिनेता मामूली या सहायक रोल्स से अपना करियर शुरू करते हैं, कुछ को बॉक्स ऑफिस पर असफलताओं का सामना करना पड़ता है, जबकि कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी एक्टिंग पर कड़ी आलोचना होती है। इंडस्ट्री में किस्मत की अहम भूमिका भी होती है,और एक्ट्रेस-सिंगर ममता मोहनदास इसका जीवंत उदाहरण हैं। ममता को जिंदगी में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, दो बार कैंसर से जुझी, फिर शादी टूटी और इसके बाद विटिलिगो से ग्रसित हुईं।
ममता मोहनदास का जन्म बहरीन में हुआ और वहीं उनकी परवरिश हुई। ग्रेजुएशन के लिए वह भारत आईं, जहां 21 साल की उम्र में उन्हें मलयालम फिल्म मयूखम (2005) में लीड रोल का ऑफर मिला। फिल्म के निर्देशक टी. हरिहरन मलयालम सिनेमा के जाने-माने नाम हैं, जिन्होंने पंचाग्नि, नखक्षथंगल, अमृतम गमया जैसी हिट फिल्मों का निर्देशन किया है। मयूखम उनकी छह साल बाद की डायरेक्टोरियल वापसी थी, जिसमें उन्होंने नए कलाकारों को मौका दिया और लीड रोल के लिए ममता मोहनदास और साइजू कुरुप को चुना। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई, लेकिन ममता के अभिनय की आलोचकों ने सराहना की। इस फिल्म ने उनके करियर को एक शुरुआत दी और धीरे-धीरे उन्हें नए प्रोजेक्ट्स मिलने लगे।
मयूखम के बाद ममता ने ममूटी की फिल्म बस कंडक्टर में छोटा रोल किया। इसके बाद उन्होंने सॉफ्टकोर फिल्म लंका (2006) में सुरेश गोपी के साथ काम किया, जो उनसे 27 साल बड़े थे। उसी साल वह मोहनलाल के साथ बाबा कल्याणी में भी नजर आईं। इन फिल्मों से उन्हें वह पहचान नहीं मिली जिसकी उन्हें उम्मीद थी। असली प्रसिद्धि उन्हें ममूटी की ऐतिहासिक फिल्म बिग बी (2007) से मिली। हालांकि इसके बाद भी उन्हें लगातार बड़े ऑफर नहीं मिले। ममता सिंगर भी हैं और उन्होंने सिंगिंग में हाथ आजमाया। तेलुगू फिल्मों में गाने गाने के बाद उन्हें थलपति विजय की फिल्म विल्लू (2009) का ब्लॉकबस्टर गाना डैडी मम्मी मिली, जिसने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने मलयालम, तमिल और तेलुगू फिल्मों में कई हिट गाने गाए।
ममता मोहनदास ने अपने जीवन में कई गंभीर चुनौतियों का सामना किया। 2009 में उन्हें हॉजकिन लिंफोमा का पता चला। उन्होंने तुरंत इलाज कराया और डेढ़ साल बाद कैंसर मुक्त घोषित हुईं। नवंबर 2011 में उन्होंने अपने बचपन के दोस्त, बहरीन के बिजनेसमैन प्रेगिथ पद्मनाभन से शादी की। शादी एक साल भी नहीं चली और दिसंबर 2012 में ममता ने अलग होने का फैसला लिया। इसी बीच 2013 में उनका कैंसर फिर उभर आया, क्योंकि उनका बोन मैरो ट्रांसप्लांट असफल रहा। उन्होंने हार नहीं मानी और लॉस एंजिल्स में इलाज करवाया। साल 2023 में उन्हें विटिलिगो नामक ऑटोइम्यून बीमारी का पता चला, जिससे त्वचा का रंग फीका पड़ने लगा। इसके बावजूद ममता ने सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा और इंस्टाग्राम पर अपनी बीमारी के बारे में खुलासा किया।
ममता मोहनदास यौन उत्पीड़न मामलों में अपने विवादित रुख के कारण भी सुर्खियों में रही। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर कोई महिला मुसीबत में पड़ती है, तो कहीं न कहीं वह इसके लिए जिम्मेदार होती है। इस बयान के कारण उन्हें जनता की आलोचना का सामना करना पड़ा।
ममता मोहनदास ने अब तक कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद 45 फिल्मों में काम किया। उनकी कुछ चर्चित फिल्में हैं महाराजा, ओट्टा, बांद्रा, जण गन मन, थिरप्पू, लालबाग। वर्तमान में वह माय डियर सिस्टर नाम की फिल्म पर काम कर रही हैं। ममता मोहनदास की कहानी इस बात का उदाहरण है कि किस तरह कठिनाइयों और चुनौतियों के बावजूद एक कलाकार ने अपने करियर और निजी जीवन में धैर्य और साहस बनाए रखा। उनका संघर्ष और सफलता दर्शकों के लिए प्रेरणादायक है।
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